डीएनए की डबल हेलिक्स से उभरती हरी बिंदुओं से बनी मानव आकृति ✦ होम Read in English

दर्शनमनोविज्ञानविज्ञान

क्या आदतें हमारे डीएनए में बसी होती हैं?

आदतें छोटे-छोटे संकेत हैं जो हमारे व्यक्तित्व की झलक देती हैं। लेकिन ये आती कहां से हैं? क्या आपको अपनी आदतें माता-पिता से विरासत में मिलती हैं, या इन पर माहौल का असर होता है?

लेखक: · 26 सितंबर 2023 · 7 मिनट में पढ़ें

आदतें छोटे-छोटे संकेत हैं जो हमारे व्यक्तित्व की झलक देती हैं। लेकिन ये आती कहां से हैं? क्या आपको अपनी आदतें माता-पिता से विरासत में मिलती हैं, या इन पर माहौल का असर होता है? इस लेख में हम आदतों की उत्पत्ति के पीछे छिपे रहस्य को टटोलेंगे।

परिचय

क्या आप जानते हैं कि आपकी आदतें कहां से आती हैं? क्या ये हमारी जीवनशैली और आस-पास के माहौल से प्रभावित होती हैं, या वंशानुगत होती हैं? इस पहेली को सुलझाने के लिए पहले यह समझना होगा कि आदतें आखिर हैं क्या।

आदतें आपकी रोज़ की दिनचर्या से कहीं बढ़कर हैं। आपकी आदतें आपके व्यक्तित्व की झलक देती हैं और आपको वह दिशा दिखाती हैं जिस पर आप चलते हैं। इनमें सुबह की दिनचर्या के कुछ खास तौर-तरीकों से लेकर जीवनशैली के आपके अनोखे चुनाव तक, सब कुछ शामिल है। संक्षेप में कहें तो आपकी आदतें आपसे जुड़ी हर चीज़ को परिभाषित करती हैं!

क्या आदतें हमारे डीएनए में बसी होती हैं?

अब सवाल यह है कि क्या ये आदतन गुण हमारे डीएनए (DNA) में बसे होते हैं, या ये रोज़मर्रा की ज़िंदगी में सामने आने वाले कुछ पर्यावरणीय कारकों का नतीजा हैं।

आनुवंशिक बनावट और मानव व्यवहार पर चर्चा करते हुए नेशनल ह्यूमन जीनोम रिसर्च इंस्टीट्यूट के पूर्व निदेशक डॉ. फ्रांसिस कॉलिन्स ने कहा था, "जेनेटिक्स बंदूक में गोली भरती है, लेकिन ट्रिगर माहौल दबाता है।" यह कथन डीएनए की आदतें गढ़ने की क्षमता और आपके व्यवहार को आकार देने में आनुवंशिक बनावट तथा माहौल की भूमिका को बखूबी उजागर करता है।

इस गुत्थी को सुलझाने के लिए हम प्रकृति बनाम परवरिश (nature versus nurture) की सदियों पुरानी बहस में उतरेंगे। आइए जानें कि हम जो आदतें अपनाते हैं, उन्हें हमारे जीन (gene) यानी हमारी प्रकृति तय करती है, या हमारा परिवेश और परवरिश।

चलिए आगे बढ़ते हैं और इस पहेली को सुलझाते हैं। लेकिन पहले यह गहराई से समझ लें कि आदतें असल में होती क्या हैं और हमारे व्यवहार को आकार देने में उनकी क्या भूमिका है।

आदतें क्या हैं?

किसी व्यक्ति की आदतें उसके व्यवहार की आधारशिला होती हैं। आदत एक ऐसा अभ्यास है जिसे आप बार-बार दोहराते हैं। एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, आदतें इसलिए बनती हैं क्योंकि दिमाग लगातार मेहनत बचाने के तरीके खोजता रहता है। इससे संकेत मिलता है कि आदतें असरदार तंत्रिका शॉर्टकट (neural shortcut) की तरह काम करती हैं।

हमारी आदतों का हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर गहरा असर होता है। ये हमारी निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करती हैं और हमारी क्रियाओं तथा प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करती हैं। आदतों में हमारा सामाजिक व्यवहार और बातचीत का तरीका ही नहीं, कुछ लतें और हमारा मिज़ाज तक शामिल हैं। हम रोज़ जो कई फैसले लेते हैं, उन्हें हमारी आदतें अनजाने में ही नियंत्रित करती हैं, और यही आदतें कई पहलुओं में हमारे व्यवहार को आकार देती हैं।

आदतों के प्रकार

आदतों के प्रकार

आदतें कई रूपों में आती हैं। ये सकारात्मक, नकारात्मक और तटस्थ हो सकती हैं।

सकारात्मक आदतों में ऐसे अभ्यास शामिल हैं जैसे सुबह जल्दी उठना, नियमित व्यायाम करना, सेहतमंद और पौष्टिक आहार लेना, और अपनी तथा अपने आस-पास की साफ-सफाई के मानकों का पालन करना।

दूसरी ओर, बुरी या नकारात्मक आदतें ज़रूरत से ज़्यादा खाने, आलसी बने रहने और निजी तथा आस-पास की स्वच्छता की अनदेखी जैसे कामों में झलकती हैं। कई लोगों में सकारात्मक और नकारात्मक, दोनों तरह की आदतों का मेल दिखता है।

अब जब हम अच्छी तरह समझ चुके हैं कि आदतें असल में क्या हैं, तो सवाल उठता है कि ये विकसित कैसे होती हैं। इस मामले की तह तक जाने के लिए हम प्रकृति बनाम परवरिश की बहस में गोता लगाएंगे।

प्रकृति बनाम परवरिश का सिद्धांत

प्रकृति बनाम परवरिश की बहस मनोविज्ञान की एक बहस है, जो मनुष्यों के व्यवहार के विकास पर प्रकृति (आपके जीन) और परवरिश (माहौल) के प्रभाव की पड़ताल करती है। यह बहस हमें यह समझने में मदद करती है कि हमारे व्यक्तित्व को गढ़ने में परवरिश और हमारी आनुवंशिक बनावट की क्या भूमिका है।

आदतें अपनाने पर प्रकृति का नज़रिया

जब हम प्रकृति की बात करते हैं, तो हमारा मतलब मूल रूप से उन जीनों से होता है जो हमें अपने माता-पिता और पूर्वजों से विरासत में मिलते हैं।

प्रकृति के नज़रिये के अनुसार, विरासत में मिले जैविक कारक और आनुवंशिक बनावट किसी व्यक्ति के आदतन गुणों, व्यवहार और मनोवैज्ञानिक विशेषताओं को तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

प्रकृति का नज़रिया यह संकेत देता है कि व्यक्तित्व, मानसिक बीमारियों और बुद्धिमत्ता जैसे गुण हमारी आनुवंशिक बनावट से काफी हद तक प्रभावित होते हैं।

इस दृष्टिकोण के पक्ष में कई वैज्ञानिक अध्ययन और प्रमाण मौजूद हैं।

वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, हमारी आनुवंशिक बनावट गर्भधारण के समय ही तय हो जाती है, और यही आनुवंशिक ढांचा हमारी सभी आदतों, गुणों, पसंद-नापसंद और यहां तक कि हमारी सेहत से जुड़ी स्थितियों का आधार बनता है।

आदतें अपनाने पर परवरिश का नज़रिया

इस मामले में परवरिश का नज़रिया आदतें अपनाने पर पर्यावरणीय प्रभावों की अहमियत पर टिका है। इसका मतलब है कि हमारे व्यक्तित्व, आदतों और व्यवहार को गढ़ने वाला प्रमुख कारक माहौल है। इस सिद्धांत के अनुसार हम "तबुला रासा" (tabula rasa) यानी कोरी स्लेट बनकर जन्म लेते हैं, और हमारा परिवेश तथा परवरिश हमें वह बनाते हैं जो हम हैं।

हमारे व्यक्तित्व को आकार देने में कई पर्यावरणीय कारक भूमिका निभाते हैं। इनमें परिवार का माहौल, हमउम्र साथियों से मेलजोल, सामाजिक कारक, सांस्कृतिक इतिहास और हमारी परवरिश शामिल हैं। परवरिश का नज़रिया यह संकेत देता है कि किसी व्यक्ति की आदतों को ढालने के मुख्य स्रोत यही कारक और अनुभव हैं।

परवरिश और सामाजिक कारक आदतों पर कैसे असर डालते हैं

हमारे बचपन के अनुभव, गहरे आघात, माता-पिता की देखभाल की गुणवत्ता या उसकी कमी, इन सबका आदतें बनने पर गहरा और स्थायी असर पड़ता है। इसके अलावा, रोज़मर्रा की ज़िंदगी में हमारा सामाजिक मेलजोल भी हमारे व्यक्तित्व और व्यवहार के ढर्रों को तय करता है। संक्षेप में, हमारे व्यवहार के रुझान आस-पास के कई पहलुओं से प्रभावित होते हैं, जैसे आदर्श व्यक्ति, सामाजिक मान्यताएं, साथियों का दबाव आदि।

यहां यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि आदतें अपनाने पर परवरिश का नज़रिया जीनों की भूमिका को पूरी तरह नकारता नहीं है। बल्कि यह हमारी आदतों को गढ़ने में माहौल के दबदबे पर ज़ोर देता है।

बहस का निष्कर्ष

क्या आदतें हमारे डीएनए में बसी होती हैं, इस सवाल से प्रकृति बनाम परवरिश की बहस के जुड़ाव को हम नकार नहीं सकते। हालांकि यह बहस यही संकेत देती है कि आदतें केवल जीनों से नहीं मिलतीं। इन पर डीएनए और माहौल, दोनों के मेल का असर होता है।

अंतिम बात: आदतों के खाके के रूप में जीन

हमारे समग्र व्यक्तित्व को गढ़ने में जीन भले ही बुनियाद हों, हमारे व्यवहारगत गुणों के विकास में माहौल और परवरिश की भूमिका को हम अनदेखा नहीं कर सकते। हमारे डीएनए में तरह-तरह के निर्देश होते हैं, जो बताते हैं कि हमारा तंत्रिका तंत्र कैसे विकसित हो और कैसे काम करे। डीएनए में न्यूरोट्रांसमीटरों (neurotransmitters) की कार्यप्रणाली और व्यवहार को संचालित करने वाले तंत्रिका मार्गों के संयोजन से जुड़ी जानकारी भी होती है। यह एक तथ्य है कि आनुवंशिक विविधताएं और खास जीनों में उत्परिवर्तन (mutation) व्यवहार में बदलाव और गड़बड़ियां ला सकते हैं। हमारे जीन भावनाओं के नियमन में भी शामिल होते हैं, जो अलग-अलग परिस्थितियों में प्रतिक्रिया देने के लिहाज़ से एक अहम पहलू है। यह जानकारी को संसाधित करने, उद्दीपनों पर प्रतिक्रिया देने और परिवेश से जुड़ने में डीएनए के प्रभाव को साबित करता है।

कुछ आनुवंशिक कारक हमारे भीतर खास आदतों के विकसित होने की संभावना बढ़ा देते हैं, जैसे लतें या जोखिम उठाने का रुझान। इसका खास तौर पर उन आनुवंशिक विविधताओं से नाता है जो कुछ आदतों के जड़ पकड़ने की संभावना बढ़ा देती हैं।

आनुवंशिक बनावट पूरी तरह तो नहीं, लेकिन संभावित रूप से हमारी आदतों में योगदान देती है। यह हमारे मिज़ाज, बदलते मूड और सामाजिक क्षमताओं समेत व्यवहार के कई पहलुओं के लिए एक जैविक ढांचा उपलब्ध कराती है।

तो हम कह सकते हैं कि हमारे व्यवहार के विकास पर पर्यावरणीय कारकों का असर तो होता है, लेकिन जीन वह खाका हैं जो शुरुआत से ही हमारे व्यक्तित्व को आकार देते हैं।