पीतल की थाली में सजे तरह-तरह के मसाले, जड़ी-बूटियाँ, बीज, लहसुन और अदरक ✦ होम Read in English

स्वास्थ्यचिकित्सा

क्या आप जानते हैं कि मसाले सिर्फ स्वाद और मूड ही नहीं बढ़ाते, सेहत के लिए भी फायदेमंद हैं?

आज की व्यस्त जिंदगी में सेहत पर ध्यान देना मुश्किल है, लेकिन खाने में कुछ मसाले शामिल करके आप स्वस्थ रह सकते हैं और अपना मूड भी बेहतर बना सकते हैं।

लेखक: · 17 सितंबर 2022 · 11 मिनट में पढ़ें · अपडेट:24 नवंबर 2022

मसाले एक सादे से भोजन को लज़ीज़ दावत में बदल सकते हैं, और अपने एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण ये मन को खुश रखने में भी मदद करते हैं। दुनिया भर में खाना पकाने में लगभग 300 आम मसाले इस्तेमाल होते हैं। ये मसाले हमारे चारों ओर मौजूद हैं और नज़दीकी बाज़ार में आसानी से मिल जाते हैं। हम जानते हैं कि स्वादिष्ट भोजन देखते ही आप में से कई लोगों के चेहरे खिल उठते हैं, और इसकी वजह है उनमें पड़े मसाले और जड़ी-बूटियाँ। मसालों की सुगंध और खाने में घुलता उनका रंग एक बुरे से बुरे दिन को भी रोशन कर देता है। लेकिन इनके फायदे सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं हैं, सेहत के लिहाज़ से भी इनके कई लाभ हैं।  

इस लेख में हम उन मसालों की बात करेंगे जो आपका मूड बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं, और उनके फायदों की भी। आप इन्हें रोज़मर्रा की जिंदगी में अपनाकर अपने पहले से ही शानदार जीवन को और निखार सकते हैं। 

तो पेश है मसालों और उनके फायदों की एक सूची।

अदरक

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अदरक कई घरों की रसोई का एक अहम मसाला है। यह अपने औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है। दुनिया में अदरक का सबसे बड़ा उत्पादक भारत है, उसके बाद नाइजीरिया, चीन, इंडोनेशिया और नेपाल आते हैं। थाईलैंड, कैमरून, बांग्लादेश, जापान और माली भी दुनिया के प्रमुख अदरक उत्पादक हैं। 

कुल मिलाकर अदरक दुनिया के लगभग 40 देशों में उगाया जाता है। यह खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए जाना जाता है और मूड को बेहतर बनाने के लिए भी अच्छा है। अदरक के सेहत से जुड़े कई फायदे भी हैं।

 इसका उपयोग सिरदर्द, आम फ्लू, खाँसी और सर्दी-ज़ुकाम में आराम पाने के लिए किया जाता है। अदरक की जड़ों में पाया जाने वाला बायोएक्टिव यौगिक रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का काम करता है। साथ ही, यह महिलाओं में मासिक धर्म के दर्द को कम करने में भी मदद करता है। पाचन ठीक रखने के लिए इसका रोज़ाना सेवन किया जा सकता है।

इसका उपयोग पूरी दुनिया में मसाले के रूप में होता है। लोग इससे मांस, खासकर चिकन, को मैरिनेट करते हैं।  

अदरक खराब पेट को शांत कर सकता है और जी मिचलाने में राहत दे सकता है। अपने एंटीऑक्सीडेंट गुणों, रक्त संचार बढ़ाने की क्षमता और एंटीसेप्टिक गुणों के साथ अदरक आपकी त्वचा की सेहत सुधारता है। यह सूजन कम करता है और अपने शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स की बदौलत मस्तिष्क को फ्री रैडिकल्स से बचाता है।

यह हमारे मस्तिष्क में याददाश्त, एकाग्रता और प्रतिक्रिया समय के लिए जिम्मेदार न्यूरोट्रांसमीटर बढ़ाकर स्मरण शक्ति भी सुधारता है। 

कैसे लें: अदरक के सेवन का सबसे आम तरीका है चाय। आप अदरक को अपने खाने में भी शामिल कर सकते हैं। यह खाने में एक अलग ही स्वाद जोड़ देता है। आप अदरक का रस भी पी सकते हैं। 

पोषण मूल्य:  इसमें आहार फाइबर, प्रोटीन और बहुत थोड़ी मात्रा में कार्बोहाइड्रेट होते हैं। अदरक में विटामिन और खनिजों के अंश भी पाए जाते हैं, जैसे विटामिन बी3 और बी6, आयरन, पोटैशियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस, ज़िंक और विटामिन सी।

दुष्प्रभाव: अगर रोज़ाना बहुत अधिक मात्रा में लिया जाए तो यह सीने में जलन, गैस, मुँह में जलन और पेट की गड़बड़ी पैदा कर सकता है। अगर आपको रक्तस्राव से जुड़ा कोई विकार है तो यह रक्तस्राव का खतरा भी बढ़ा सकता है।

अदरक के सप्लीमेंट शुरू करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से बात करें।

लौंग

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लौंग मिर्टेसी (Myrtaceae) कुल के पेड़ सिज़ीजियम एरोमैटिकम (Syzygium aromaticum) की सुगंधित फूल कलियाँ हैं। चीन में हान राजवंश के दौरान जब भी किसी को सम्राट से मिलने जाना होता था, तो लौंग का उपयोग प्राकृतिक माउथ फ्रेशनर के रूप में किया जाता था।

आज इंडोनेशिया दुनिया में लौंग का सबसे बड़ा उत्पादक है। मेडागास्कर, श्रीलंका, केन्या, चीन और मलेशिया भी दुनिया के शीर्ष लौंग उत्पादकों में शामिल हैं। 

लौंग एक सुगंधित मसाले के रूप में इस्तेमाल होती है और पारंपरिक चिकित्सा में इसका उपयोग होता आया है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट और सूक्ष्मजीव-रोधी गुण भरपूर होते हैं। ये शरीर में बैक्टीरिया की वृद्धि रोकने में मदद कर सकते हैं। इसका तेल ई.कोलाई (E.coli) नामक बैक्टीरिया को मारने में भी मदद कर सकता है, जो फूड पॉइज़निंग पैदा करने वाला बैक्टीरिया का एक प्रकार है। 

कई अध्ययनों से पता चला है कि लौंग रक्त शर्करा को नियंत्रित रखने में मदद कर सकती है। इसीलिए खाना पकाने में इस मसाले के इस्तेमाल की सलाह दी जाती है। 

लौंग में मैंगनीज़ प्रचुर मात्रा में होता है, जो हड्डियों का घनत्व और उनकी सेहत बढ़ाने में मदद करता है। अपने सूजन-रोधी और बैक्टीरिया-रोधी प्रभावों के कारण लौंग का इस्तेमाल दाँत दर्द और दंत पीड़ा में किया जाता है। 

यह भी कहा जाता है कि यह जोड़ों के दर्द के लिए अच्छी है और व्यक्ति की रोग-प्रतिरोधक क्षमता तथा मूड, दोनों को बढ़ाती है। 

कैसे लें: आप इसे या तो तेल के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं या खाने में मसाले के रूप में। आप इसे चाय में भी डाल सकते हैं। कुछ लोग लौंग का उपयोग मांस की सीज़निंग और मैरिनेशन में भी करते हैं।

पोषण मूल्य: लौंग विटामिन के, पोटैशियम, यूजेनॉल और बीटा-कैरोटीन का बेहतरीन स्रोत है।

दुष्प्रभाव: लौंग वाली सिगरेट पीने से रक्तस्रावी पल्मोनरी एडिमा, ब्रोंकाइटिस, निमोनिया, व्यावसायिक एलर्जिक कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र का अवसाद हो सकता है। बहुत अधिक मात्रा में खाने या उसके संपर्क में आने से ऊतकों को क्षति, अचानक दौरे पड़ने का सिंड्रोम, यकृत और गुर्दों को नुकसान, और कोमा तक हो सकता है।

दालचीनी

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दालचीनी एक ऐसा मसाला है जो सिनामोमम कुल की कई पेड़ प्रजातियों की भीतरी छाल से प्राप्त होता है। इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा दालचीनी उत्पादक है, जो विश्व उत्पादन का 43% पैदा करता है। उसके बाद चीन का स्थान है, जिसकी हिस्सेदारी 33% है। वियतनाम और श्रीलंका भी क्रमशः 15% और 8% हिस्सेदारी के साथ दालचीनी के शीर्ष 5 उत्पादकों में आते हैं। 

अपनी सुगंध के साथ-साथ दालचीनी सेहत के लिए भी फायदेमंद है। दालचीनी में पॉलीफेनॉल जैसे एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो मूड के लिए अच्छे हैं। एक अध्ययन कहता है कि दालचीनी की खुशबू सूँघने से व्यक्ति की संज्ञानात्मक क्षमता और याददाश्त बढ़ सकती है।

इसके अलावा, यह एक प्राकृतिक खाद्य परिरक्षक का काम करती है। यह मसाला दुनिया में हर जगह इस्तेमाल होता है और व्यक्ति का मूड बेहतर बनाने के लिए अच्छा है।  

दालचीनी का मुख्य यौगिक सिनामाल्डिहाइड तरह-तरह के संक्रमणों से लड़ने में मदद करता है। इसके बैक्टीरिया-रोधी और सूजन-रोधी गुण गंभीर संक्रमण होने का खतरा कम करने में मदद करते हैं। यह आम सर्दी-ज़ुकाम के इलाज में भी लाभकारी है। यह अपच, मधुमेह और खाँसी के लिए अच्छी है। 

कैसे लें: दालचीनी पाउडर के रूप में इस्तेमाल होती है। बहुत से लोग व्यंजन पकाते समय इसे मुख्य मसाले के रूप में इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा इसका उपयोग चाय, बेकरी उत्पादों और पेय पदार्थों में भी होता है।

पोषण मूल्य: यह कैल्शियम और पोटैशियम से भरपूर है। इसमें आयरन, फास्फोरस, मैग्नीशियम और विटामिन ए बहुत थोड़ी मात्रा में होते हैं।

दुष्प्रभाव: दालचीनी का अत्यधिक सेवन कैंसर के खतरे की ओर ले जा सकता है। यह यकृत को भी नुकसान पहुँचा सकती है। चूँकि दालचीनी में मौजूद सिनामाल्डिहाइड गले में जलन पैदा करता है, एक ही बार में बहुत अधिक सेवन से साँस लेने में परेशानी हो सकती है।

अस्थमा और साँस की अन्य समस्याओं वाले लोगों को सावधान रहना चाहिए कि गलती से दालचीनी साँस के साथ अंदर न चली जाए। 

अगर आप सेहत से जुड़ी किसी समस्या के लिए किसी भी तरह की दवा ले रहे हैं, तो इस मसाले को अपने भोजन में शामिल करने से पहले कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लें। सेवन से पहले इसलिए, क्योंकि दवा के साथ मिलकर यह अपना असर और तेज़ कर सकती है और गंभीर समस्या खड़ी कर सकती है। 

इलायची

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इलायची अपनी मनभावन खुशबू और स्वाद के लिए प्रसिद्ध है। इसकी सुगंध व्यक्ति का मूड बेहतर बना सकती है। इंडोनेशिया, भारत, ग्वाटेमाला, नेपाल, श्रीलंका और लाओस दुनिया के प्रमुख इलायची उत्पादकों में से हैं। भूटान, तंज़ानिया, ग्रेनाडा और होंडुरास कुछ अन्य उत्पादक हैं। 

यह एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर है, रक्त को विषमुक्त करने में मदद करती है, और बार-बार पेशाब को बढ़ावा देकर महत्वपूर्ण अंगों के आसपास जमा पानी को बाहर निकालती है। इलायची में सिनिओल नामक तेल होता है, जिसमें सूक्ष्मजीव-रोधी गुण होते हैं।

इसके अलावा, यह मसूड़ों की बीमारियों और कैविटी की समस्याओं को पनपने से भी रोक सकती है। अपने एंटीऑक्सीडेंट गुण के कारण यह सूजन कम करती है। यह त्वचा के लिए भी अच्छी है, खासकर मुँहासों वाली त्वचा के लिए। 

कैसे लें: आप इसे पाउडर के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। आप इसे अपने खाने में मसाले के रूप में भी डाल सकते हैं। लोग आम तौर पर इसका उपयोग करी वाले व्यंजनों, कुकीज़, स्मूदी और यहाँ तक कि चीज़केक बनाने में भी करते हैं।

पोषण मूल्य: इलायची पोटैशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे खनिजों का अच्छा स्रोत है। साथ ही, यह आयरन और मैंगनीज़ का भी बेहतरीन स्रोत है। 

इसके अलावा, ये सुगंधित फलियाँ कई ज़रूरी विटामिनों से भरपूर हैं, जिनमें राइबोफ्लेविन, नियासिन और विटामिन सी शामिल हैं, जो अच्छी सेहत के लिए आवश्यक हैं।

दुष्प्रभाव: यह सीने में दर्द और जकड़न पैदा कर सकती है। इलायची के गंभीर दुष्प्रभावों में से एक है इससे होने वाली एलर्जी। इलायची लोगों में अतिसंवेदनशीलता और साँस से जुड़ी एलर्जी पैदा कर सकती है।

बहरहाल, अगर आप कोई दवा ले रहे हैं तो इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर से मार्गदर्शन लेना ज़रूरी है।

हल्दी

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हल्दी की खेती पूरी दुनिया में होती है। इसके शीर्ष उत्पादक हैं भारत, चीन, ताइवान, इंडोनेशिया, श्रीलंका, जावा, ब्राज़ील, पेरू, अफ्रीका के कई हिस्से और ऑस्ट्रेलियाभारत दुनिया में हल्दी का सबसे बड़ा उत्पादक है।

इरोड, जिसे “येलो सिटी”, “टरमरिक सिटी” या “टेक्सटाइल सिटी” भी कहा जाता है, दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु का एक शहर है; यह दुनिया का सबसे बड़ा हल्दी उत्पादक और हल्दी का सबसे महत्वपूर्ण व्यापार केंद्र है।

महाराष्ट्र का शहर सांगली हल्दी के उत्पादन और व्यापार केंद्र के रूप में आकार और महत्व में केवल इरोड से ही पीछे है। 

 हल्दी कई घरों में मसाले और औषधि, दोनों रूपों में इस्तेमाल होती है। हाल के समय में विज्ञान भी इन पारंपरिक दावों की पुष्टि करने लगा है कि हल्दी में करक्यूमिनॉइड नामक औषधीय गुणों वाले यौगिक होते हैं।

इनमें सबसे महत्वपूर्ण है करक्यूमिन। करक्यूमिन हल्दी का मुख्य सक्रिय तत्व है। इसमें शक्तिशाली सूजन-रोधी प्रभाव होते हैं और यह एक बहुत मजबूत एंटीऑक्सीडेंट है। 

इसमें बायोएक्टिव यौगिक भी होते हैं। अपने सूजन-रोधी गुणों के कारण हल्दी शरीर के दर्द में आराम दिलाने में भी मदद कर सकती है।  

हालाँकि, हमें यह समझना होगा कि हल्दी में केवल 3% करक्यूमिन होता है, और शरीर इसे बहुत अच्छी तरह सोख नहीं पाता। इसका मतलब है कि इलाज के लिए पूरी तरह इसी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। 

कैसे लें: आप इसे अपने खाने में इस्तेमाल कर सकते हैं, क्योंकि यह एक बेजोड़ पीला रंग देती है। आप हल्दी की चाय बना सकते हैं या इसे गर्म पानी के साथ ले सकते हैं। आप इसका फेस मास्क भी बना सकते हैं, क्योंकि यह चेहरे के मुँहासे कम करने में मदद करती है। 

पोषण मूल्य: अपने सूजन-रोधी गुणों के साथ-साथ हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट्स, बहुत थोड़ी मात्रा में प्रोटीन, विटामिन सी और कार्बोहाइड्रेट होते हैं। इसमें फाइबर और आयरन भी होता है। 

दुष्प्रभाव: गर्भवती महिलाओं और खून पतला करने वाली दवाएँ ले रहे लोगों को हल्दी के सप्लीमेंट लेने से बचना चाहिए, क्योंकि इनमें खून पतला करने का प्रभाव होता है। बहुत अधिक मात्रा में लेने पर यह पेट को अधिक गैस्ट्रिक एसिड बनाने के लिए उकसा सकती है। यह कुछ लोगों के लिए मददगार हो सकता है, तो वहीं कुछ लोगों के लिए नुकसानदेह भी। 

हम घरेलू नुस्खों पर पूरी तरह निर्भर होकर उन्हें गंभीर बीमारियों का इलाज नहीं मान सकते। हालत बिगड़ने पर हमेशा डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।


ऐसे और भी कई मसाले हैं जो सेहत और मूड बेहतर बनाने के लिए अच्छे हैं, जैसे लहसुन, दालचीनी, सौंफ, जिनसेंग (Ginseng) वगैरह, कुछ ही नाम लें तो। मसाले न सिर्फ खाने में स्वाद जोड़ते हैं बल्कि व्यक्ति को स्वस्थ बनाने में भी मदद करते हैं। जड़ी-बूटियों को रोज़मर्रा की जिंदगी में अपनाकर आप उन बीमारियों से बच सकते हैं जो आगे चलकर बड़ी समस्या बन सकती हैं। मसालों की सही जानकारी और समझ के साथ आप अपना और अपने प्रियजनों का जीवन स्वस्थ बना सकते हैं।