फास्ट फूड की ट्रे जिसमें लिपटा हुआ बर्गर, कटी हुई फ्रेंच फ्राइज़ और बर्फ वाला सोडा रखा है ✦ होम Read in English

भोजन और व्यंजनस्वास्थ्य

क्या आप जानते हैं कि जंक फूड आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है?

जंक फूड व्यक्ति को सिर्फ शारीरिक रूप से ही प्रभावित नहीं करता, कुछ अध्ययन बताते हैं कि यह मानसिक स्वास्थ्य के बिगड़ने की भी एक उभरती वजह है।

लेखक: · 17 अगस्त 2022 · 7 मिनट में पढ़ें · अपडेट:24 नवंबर 2022

आपने आखिरी बार बर्गर और फ्राइज़ की स्वादिष्ट दावत कब उड़ाई थी? पिज़्ज़ा और टैको के खयाल से ही मुझे भूख लग रही है, और मुझे यकीन है कि आप लोगों का भी यही हाल होगा। खैर, जब भी हमें भूख लगती है या खाना बनाने में आलस आता है, हम जंक फूड का सहारा लेते हैं, जिसे फास्ट फूड भी कहा जाता है। यह आसानी से मिल जाता है और इसे बनने में ज़्यादा समय भी नहीं लगता। आखिर इसे फास्ट फूड यूँ ही तो नहीं कहते।

जंक फूड अब घर के बने खाने का विकल्प बन गया है। तेज़ रफ्तार और भागदौड़ भरी जीवनशैली ने खाने की प्राथमिकता भी बदल दी है। अक्सर खाना बनाने या पकाने का समय निकालना मुश्किल हो जाता है; इसलिए लोग जंक फूड को भोजन के विकल्प के रूप में चुन लेते हैं। जंक फूड अब रोज़मर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। 

लेकिन क्या आप जानते हैं कि जंक फूड आपके शरीर और मन के लिए स्वास्थ्यकर नहीं है? जंक फूड में नमक, चीनी और वसा बहुत अधिक होते हैं, जबकि पोषण न के बराबर। यह व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य को तो प्रभावित करता ही है, उसे मानसिक रूप से भी थका देता है। मानव मन पर इसके असर की तीव्रता मापने के लिए कई अध्ययन चल रहे हैं। लेकिन शारीरिक स्वास्थ्य पर इसका असर जगजाहिर है। दुनिया में मोटापे और मधुमेह की दर दिन-ब-दिन बढ़ रही है, और इसकी एक वजह है लोगों में फास्ट फूड का तेज़ी से बढ़ता क्रेज़।

आइए, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर जंक फूड के असर की बात करते हैं।

Photo by Robin Stickel: https://www.pexels.com/photo/fries-and-burger-on-plate-70497/

जंक फूड की बात करें तो विकल्पों की भरमार है। युवा पीढ़ी के सामने चुनने के लिए ढेरों विकल्प मौजूद हैं। शानदार मार्केटिंग योजनाओं के साथ कंपनियों ने अपने विज्ञापन का स्तर भी कई गुना बढ़ा दिया है। 

विज्ञापन के आकर्षक हथकंडे लगभग हर पीढ़ी के लोगों को लुभाते हैं। पिछले एक दशक में जंक फूड के बाज़ार में ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई है। लेकिन देखने में यह चाहे जितना भी मुँह में पानी लाने वाला लगे, इससे जुड़ी समस्याएँ बहुत सारी हैं। समय के साथ व्यक्ति में कई जटिलताएँ पैदा हो सकती हैं। हम इनमें से कुछ समस्याओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

अल्पकालिक समस्याएँ

शारीरिक स्वास्थ्य

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फास्ट फूड में कैलोरी, वसा और चीनी की मात्रा बहुत अधिक होती है। अधिक मात्रा में चीनी का सेवन मधुमेह की ओर ले जा सकता है। सिर्फ मधुमेह ही नहीं, शुगर रश तंत्रिका संबंधी क्षति भी पहुँचाता है। एकेडमी ऑफ न्यूट्रिशन एंड डायटेटिक्स के प्रवक्ता और आहार विशेषज्ञ (RDN) वेस्ली डेलब्रिज (Wesley Delbridge) कहते हैं कि “अधिक मात्रा में शर्करा तंत्रिका संबंधी क्षति पहुँचाती है” क्योंकि यह सूजन को भड़काती है। 

पोषक तत्वों के सेवन में असंतुलन

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जंक फूड ढेर सारी कैलोरी तो देता है, लेकिन अफसोस कि हमारे शरीर को चाहिए जो पोषक तत्व, उनमें से बहुत कम। चूँकि इन फास्ट फूड में विटामिन और खनिजों की कमी होती है, शरीर अपने ज़रूरी पोषक तत्वों का लाभ नहीं उठा पाता। जंक फूड को डिस्क्रीशनरी फूड भी कहा जाता है, यानी ऐसे खाद्य पदार्थ जो “पोषक ज़रूरतें पूरी करने के लिए आवश्यक नहीं हैं और पाँच खाद्य समूहों में नहीं आते”।

ऑस्ट्रेलिया और कई अन्य देशों के आहार दिशानिर्देशों के अनुसार, ये पाँच खाद्य समूह हैं: अनाज और धान्य, सब्ज़ियाँ और दालें, फल, दुग्ध उत्पाद और उनके विकल्प, तथा मांस और मांस के विकल्प। एक ब्रेन स्कैन से यह भी पता चलता है कि चीनी की लत लग सकती है। आप इसका चाहे जितना सेवन कर लें, आपको हमेशा और अधिक की तलब लगी रहेगी।

मूड में उतार-चढ़ाव

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फास्ट फूड कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होते हैं, जिससे रक्त शर्करा में उतार-चढ़ाव होता है। कभी-कभी कम या अधिक रक्त शर्करा पैनिक अटैक, अनिद्रा और चिंता के अन्य लक्षण पैदा कर सकती है। तले हुए भोजन में ओमेगा-3 फैटी एसिड की कमी होती है, जिसकी वजह से मस्तिष्क में चिंता जैसे लक्षण उभर सकते हैं। 

दीर्घकालिक समस्याएँ

अल्पकालिक समस्याओं के अलावा जंक फूड कई दीर्घकालिक समस्याओं के लिए भी जिम्मेदार है। जंक फूड न सिर्फ पाचन तंत्र की प्राकृतिक व्यवस्था बिगाड़ता है बल्कि व्यक्ति के जीवन में उथल-पुथल भी मचा देता है। आइए, इनमें से कुछ समस्याओं पर रोशनी डालते हैं।

अवसाद और चिंता

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एक स्पेनिश अध्ययन के अनुसार, फास्ट फूड खाने वालों में अवसाद की आशंका न खाने वालों की तुलना में 51 प्रतिशत अधिक होती है।

हृदय से जुड़ी बीमारियाँ

चूँकि जंक फूड में नमक बहुत अधिक होता है, यह व्यक्ति की रक्त वाहिकाओं के काम पर असर डाल सकता है। नमक की अधिक मात्रा व्यक्ति का रक्तचाप बढ़ा सकती है, जिससे वह हार्ट अटैक, स्ट्रोक या गुर्दे की बीमारी जैसे हृदय रोगों के प्रति अधिक असुरक्षित हो जाता है।

मोटापा/वज़न बढ़ना

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अक्सर लोगों को फास्ट फूड की लत लग जाती है और वे इसका रोज़ाना सेवन करने लगते हैं। जंक फूड में कैलोरी बहुत अधिक होती है, जिसका रोज़ाना सेवन वज़न बढ़ने या मोटापे की ओर ले जाता है। अगर कोई व्यक्ति जितनी कैलोरी खर्च करता है उससे अधिक खाता है, तो उसका वज़न बढ़ता है। 

पाचन संबंधी समस्याएँ

जंक फूड में फाइबर बेहद कम होता है। डॉक्टरों का मानना है कि यह कब्ज़ या डायवर्टीकुलर रोग जैसी पाचन संबंधी अन्य समस्याएँ पैदा कर सकता है। यह पाचन में मदद करने वाले स्वस्थ आँत के बैक्टीरिया को भी घटा सकता है

याददाश्त में कमी और सीखने की क्षमता में गिरावट

एक हालिया अध्ययन बताता है कि याददाश्त में कमी और वसा तथा कार्बोहाइड्रेट से बेहद भरपूर असंतुलित आहार के बीच एक संबंध है। फास्ट फूड व्यक्ति की सीखने और याद रखने की क्षमता घटा सकता है। इस तरह का आहार अल्ज़ाइमर रोग और पार्किंसन रोग का खतरा भी बढ़ा सकता है। 

जंक फूड मस्तिष्क में डोपामाइन जैसे “हैप्पी हॉर्मोन” को सक्रिय कर सकते हैं, जिससे इन्हें खाते समय हमें अच्छा महसूस होता है। इस वजह से वही खुशी दोबारा पाने के लिए हमें और अधिक जंक फूड खाने की इच्छा होने लगती है। जब मस्तिष्क को खरीदारी या खाने से किसी इनाम की उम्मीद होती है, तो वह डोपामाइन छोड़ता है।

चूँकि फास्ट फूड स्वादिष्ट, सुविधाजनक और आसानी से उपलब्ध है, अधिक से अधिक लोग पूरी तरह इसी की ओर रुख कर रहे हैं। सेहतमंद घरेलू खाने से हर वक्त उपलब्ध जंक फूड की ओर जाना सिर्फ सेहत का नहीं, जीवनशैली का भी मामला है। लोगों को जंक फूड की लत इसलिए भी लग जाती है क्योंकि इसे ज़्यादा चबाना नहीं पड़ता और यह मुँह में आसानी से घुल जाता है। ये अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ व्यक्ति की ताज़े और संपूर्ण भोजन की चाह को कम कर देते हैं। 

जंक फूड कंपनियाँ ग्राहकों को अपने उत्पादों की ओर खींचने के लिए तरह-तरह की मार्केटिंग योजनाएँ अपना रही हैं। फास्ट फूड के विज्ञापन अभियानों में बढ़ोतरी बाज़ार में प्रसंस्कृत भोजन की भारी माँग पैदा कर रही है। 

एक अध्ययन में सामने आया कि 12 से 17 वर्ष के किशोर एक ही साल में वेबसाइटों पर 1 करोड़ 44 लाख से अधिक खाद्य विज्ञापन देखते हैं। सबसे अधिक विज्ञापित उत्पाद हैं केक, कुकीज़ और आइसक्रीम। बच्चों में लोकप्रिय यूट्यूब वीडियो की जाँच करने वाले एक अन्य अध्ययन में बताया गया कि सभी विज्ञापनों में से 38% खाने या पेय पदार्थ से जुड़े थे और उन खाद्य विज्ञापनों में से 56% जंक फूड के थे।


इसमें कोई शक नहीं कि ये फास्ट फूड कितने लज़ीज़ होते हैं, लेकिन बात सिर्फ ज़ुबान की नहीं, पूरी सेहत की है। जिस तरह लोग, खासकर युवा पीढ़ी, घर के बने खाने से हटकर इन अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की ओर जा रहे हैं, वह चिंता का विषय है। सेहतमंद भोजन एक मजबूत शरीर और मस्तिष्क बनाने में मदद करता है, जिसका मुकाबला फास्ट फूड कभी नहीं कर सकता।