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स्वास्थ्य

दिल को सेहतमंद रखने के 13 तरीके

हृदय शरीर का केंद्र है जो रक्त संचार प्रणाली को ठीक से चलाता है। एक सेहतमंद दिल पूरे शरीर की सेहत के लिए अच्छा है।

लेखक: · 12 नवंबर 2022 · 13 मिनट में पढ़ें · अपडेट:24 नवंबर 2022

हृदय शरीर का सबसे ज़रूरी अंग है। वैसे तो बाकी सभी अंग भी अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन दिल शरीर का केंद्र बिंदु है। यह चौबीसों घंटे काम करता है ताकि रक्त संचार प्रणाली ठीक से चलती रहे। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में दिल से जुड़ी बीमारियों में काफी बढ़ोतरी हुई है, जैसे डायबिटीज़, हार्ट अटैक वगैरह। इसकी कई वजहों में से एक है लोगों की जीवनशैली में आया ज़बरदस्त बदलाव। आजकल लोग ऐसी कई अस्वस्थ आदतों में पड़ रहे हैं जो न सिर्फ उनके दिल पर असर डालती हैं बल्कि उनकी पूरी सेहत को बिगाड़ देती हैं। 

इस लेख के ज़रिए हम आपके दिल की सेहत सुनिश्चित करने के कुछ सबसे आसान तरीके साझा करेंगे। चिंता न करें, इसमें ज़्यादा पैसा नहीं लगता। बात बस अपना समय और मेहनत सही दिशा में लगाने की है। 

दिल को सेहतमंद रखने के 13 तरीकों की सूची यह रही

रोज़ व्यायाम करें

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व्यायाम करना या किसी भी तरह की शारीरिक गतिविधि में हिस्सा लेना आपके दिल की सेहत को बेहतर बनाने में मदद करता है। लेकिन अगर भारी वज़न उठाने का ख्याल आपको डराता है तो घबराइए नहीं, आप हल्की चीज़ों से शुरुआत कर सकते हैं, जैसे तेज़ चाल से टहलना, सीढ़ियां चढ़ना, बागवानी या अपने पसंदीदा गाने पर डांस करना। शारीरिक गतिविधियां ब्लड प्रेशर को काबू में रखने और कोलेस्ट्रॉल तथा खून के दूसरे लिपिड्स को नियंत्रित करने में मदद करती हैं।  

हर कोई अलग फिटनेस रुटीन अपनाता है। कुछ लोग घर पर ही वर्कआउट करना पसंद करते हैं, तो कुछ प्रोफेशनल ट्रेनर की निगरानी में। वर्कआउट के ढेरों विकल्प मौजूद हैं और आप अपनी सुविधा के हिसाब से चुन सकते हैं। कम समय से वर्कआउट शुरू करें और फिर धीरे-धीरे उसकी अवधि, तीव्रता और बारंबारता बढ़ाएं।   

 अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (American Heart Association) हर हफ्ते 75 मिनट की तेज़ एरोबिक गतिविधि और 150 मिनट के मध्यम तीव्रता वाले व्यायाम की सलाह देता है। आमतौर पर अपनाए जाने वाले कुछ तरीके हैं एरोबिक्स, ज़ुम्बा, योग, दौड़ना आदि। 

कोई भी शारीरिक गतिविधि शुरू करने से पहले उसके फायदे समझने की कोशिश करें और यह भी कि वह दिल को कैसे सक्रिय करती है। फिटनेस रुटीन अपनाने से दिमाग को भी अभ्यास मिलता है और मूड भी अच्छा होता है। अक्सर लोग तनाव, उदासी या मुश्किल दौर में जिम जाना पसंद करते हैं, क्योंकि व्यायाम से एंडोर्फिन निकलते हैं जो इंसान को खुश और शांत बनाते हैं।

वर्कआउट सेशन को दिलचस्प बनाने के लिए आप बैकग्राउंड में संगीत चला सकते हैं या किसी दोस्त या साथी के साथ व्यायाम कर सकते हैं। 

भरपूर नींद लें

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दिल के बेहतर कामकाज के लिए गहरी और बिना रुकावट वाली नींद बहुत ज़रूरी है। जो लोग पर्याप्त नींद नहीं लेते, उनमें हृदय रोग होने की आशंका पूरी नींद लेने वालों की तुलना में ज़्यादा होती है।

दिन में तीन घंटे से कम सोने पर शरीर की प्रतिक्रिया धीमी पड़ जाती है और इंसान खुद को सुस्त और भारी महसूस कर सकता है। यही कई लोगों में चिड़चिड़ेपन और बेचैनी की बड़ी वजह भी है, क्योंकि यह दिल को रक्त संचार तेज़ करने पर मजबूर कर ब्लड प्रेशर में दखल देती है।    

आमतौर पर दिन में छह से नौ घंटे की नींद लेने की सलाह दी जाती है, क्योंकि शरीर नींद को दिन भर की भागदौड़ से उबरने और खुद को ठीक करने के मौके की तरह इस्तेमाल करता है। अगर आपको सोने में परेशानी हो रही है तो जनरल प्रैक्टिशनर से सलाह लें।

ट्रांस फैट को न कहें और सेहतमंद खानपान अपनाएं

आजकल लोग सेहतमंद विकल्पों के बजाय पैकेट बंद खाना चुन रहे हैं। डिब्बाबंद बीन्स, डिब्बाबंद मछली या मांस, बेक किए हुए उत्पाद आदि चीज़ें ट्रांस फैट से भरी होती हैं, जो उद्योगों में वनस्पति तेल में हाइड्रोजन मिलाकर बनाया जाता है। 

ट्रांस फैट कई पुरानी बीमारियों और दिल से जुड़ी समस्याओं की जड़ है। यह सिर्फ दिल के लिए ही नुकसानदेह नहीं है, बल्कि किडनी, दिमाग जैसे दूसरे अंगों पर भी असर डालता है।

इसलिए पूरी तरह पैकेट बंद चीज़ों पर निर्भर रहने के बजाय ताज़ा खाने का विकल्प चुनें। घर का बना खाना अपने भोजन का हिस्सा बनाने की कोशिश करें। सेहतमंद खानपान दिल को स्वस्थ रखता है और ब्लड प्रेशर, टाइप 2 डायबिटीज़ और कोलेस्ट्रॉल का खतरा कम करता है। 


क्या आप जानते हैं कि पैकेट बंद खाना आपकी शारीरिक और मानसिक सेहत पर बुरा असर डाल सकता है?

पैकेट बंद खाने के बारे में और जानने के लिए हमारा यह लेख पढ़ें -  पैकेट बंद खाने से बचने की वजहें।


तनाव को संभालें 

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अब हृदय रोगों की एक और बड़ी वजह की बात करते हैं, यानी तनाव, जो इंसान की मानसिक और शारीरिक सेहत पर असर डालता है और दिल के सामान्य कामकाज को बिगाड़ देता है।

तनाव कई तरह का होता है और हर तरह का तनाव इंसान के दिल की सेहत पर बुरा असर डाल सकता है। आइए इन पर एक नज़र डालते हैं -  

  1. एक्यूट स्ट्रेस (Acute Stress) - यह लोगों में सबसे आम तरह का तनाव है। यह ज़िंदगी के किसी अचानक आए संकट या किसी सदमे देने वाली घटना का नतीजा होता है जो इंसान को स्तब्ध कर देती है। इसमें अक्सर सांस फूलने लगती है और शरीर की ऑक्सीजन की ज़रूरत पूरी करने के लिए दिल को रक्त संचार तेज़ करना पड़ता है। एक्यूट स्ट्रेस एक मिनट से लेकर एक महीने तक रह सकता है, यह इस पर निर्भर करता है कि इंसान उससे कैसे निपटता है। 
  1. एपिसोडिक एक्यूट स्ट्रेस (Episodic Acute Stress) - जो तनाव किसी इंसान को बार-बार या किस्तों में झेलना पड़ता है, उसे एपिसोडिक एक्यूट स्ट्रेस कहते हैं। ऐसा दुर्घटना, तलाक, कम्फर्ट ज़ोन में अचानक बदलाव जैसी स्थितियों में होता है। इसका असर हर इंसान पर अलग होता है और उसके तनाव से निपटने के तरीके पर निर्भर करता है, लेकिन आमतौर पर यह दिल की धड़कन बढ़ा देता है जिससे दिल को सामान्य से तेज़ रफ्तार से खून पंप करना पड़ता है। एक अध्ययन के मुताबिक लगभग 31.1% अमेरिकी अपने जीवनकाल में कभी न कभी एंग्ज़ायटी से गुज़रते हैं। 
  1. क्रॉनिक स्ट्रेस (Chronic Stress) - क्रॉनिक स्ट्रेस का असर इंसान के लिए काफी नुकसानदेह माना जाता है। यह आमतौर पर उन लोगों को होता है जो भविष्य की परिस्थितियों को लेकर हमेशा चिंतित रहते हैं। यह तनाव की एक लंबी खिंचती भावना है जो नर्वस सिस्टम को तनाव पर प्रतिक्रिया तैयार करने का ज़्यादा मौका ही नहीं देती। यह हार्ट अटैक जैसी कई पुरानी बीमारियों की वजह बन सकता है। इसलिए हालात बिगड़ने पर मनोचिकित्सक से सलाह लेने की सलाह दी जाती है। 

ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम (Broken Heart Syndrome) - नाम पर मत जाइए, यह दिल टूटने की कोई कहानी नहीं है, लेकिन आपके दिल से इसका रिश्ता ज़रूर है। हमें यकीन है कि आपने भी ज़िंदगी में कम से कम एक बार ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम झेला होगा।

यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें इंसान को अचानक सीने में दर्द महसूस हो सकता है या हार्ट अटैक जैसा लग सकता है। ऐसा आमतौर पर बेहद तीव्र भावनाओं, तनाव भरी घटनाओं, या किसी शारीरिक बीमारी या सर्जरी की वजह से भी होता है। यह थोड़े समय के लिए ही होता है, लेकिन इंसान को दिल से जुड़ी कई बीमारियों के प्रति कमज़ोर बना देता है। 

तो अगली बार अगर आपको कभी भावनाओं का अचानक उबाल सीने पर भारी पड़ता महसूस हो, तो खुद को शांत करने की कोशिश करें या गहरी सांसें लें। इससे आपकी इंद्रियों को सुकून मिलेगा और आपकी धड़कन धीरे-धीरे सामान्य हो जाएगी। 

धूम्रपान और तंबाकू छोड़ें 

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आजकल लोग तरह-तरह की परेशानियों और तनाव से निपटने के लिए धूम्रपान और शराब का सहारा ले रहे हैं। युवाओं में तो यह एक छाया हुआ चलन बनता जा रहा है, जो इसके असर में इसके तमाम नुकसानों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। धूम्रपान रक्त वाहिकाओं में थक्के बनाकर फेफड़ों और दिल को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। 

बाज़ार में धूम्रपान छोड़ने में मदद करने वाले कई उत्पाद मौजूद हैं, जैसे गम, लोज़ेंज और पैच। हालांकि कई बार लत छोड़ना दम घोंटने जैसा लग सकता है और आपको झुंझलाहट हो सकती है, इसलिए परिवार के लोगों या डॉक्टर की मदद लेने में झिझकें नहीं।   

अपने चीनी के सेवन पर नज़र रखें

चीनी चाहे जितनी लुभावनी हो, सेहत के लिए अच्छी नहीं है। आजकल पैकेट बंद खाने में चीनी की मात्रा बहुत ज़्यादा होती है, जो धीरे-धीरे आपको डायबिटीज़ की ओर ले जाती है। औद्योगिक रिफाइंड चीनी कई हृदय रोगों का खतरा बढ़ाती है, जो दिल और रक्त वाहिकाओं को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए अपने चीनी के सेवन पर नज़र रखना ज़रूरी है। जिनके परिवार में ऐसी पुरानी बीमारियों का इतिहास रहा है, उन्हें सोच-समझकर खाने का चुनाव करना चाहिए और समय-समय पर अपना शुगर लेवल जांचते रहना चाहिए। 

अपना वज़न काबू में रखें 

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आमतौर पर लोग अपनी खाने की आदतों पर ज़्यादा ध्यान नहीं देते, जिसका नतीजा शरीर में असामान्य या ज़रूरत से ज़्यादा चर्बी जमा होने के रूप में सामने आता है। मोटापा कई तरह की अक्षमताओं की मुख्य वजह है और इसका कई हृदय रोगों से सीधा संबंध है।  

लोगों में मोटापे की बढ़ती दर की उभरती वजहों में से एक जंक फूड का ज़रूरत से ज़्यादा सेवन भी है। जंक फूड भले ही कुछ देर के लिए आपकी भूख मिटा दे, लेकिन यह आपको कई गंभीर बीमारियों की ओर ले जा सकता है। इसके अलावा जो लोग रोज़ व्यायाम नहीं करते, उनमें मोटापे का खतरा ज़्यादा होता है, जो इंसान के कोलेस्ट्रॉल लेवल पर गंभीर असर डालता है और उसे टाइप 2 डायबिटीज़, ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी बीमारियों के प्रति कमज़ोर बना देता है। 

संतुलित आहार 

सेहतमंद ज़िंदगी जीने के लिए सभी ज़रूरी विटामिन और मिनरल्स को ध्यान में रखते हुए संतुलित आहार बनाए रखना बेहद ज़रूरी है। एक-दो दिन अपने खानपान पर गौर करें ताकि आप समझ सकें कि आप क्या-क्या खा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानसिक और शारीरिक, दोनों तरह की सेहत के लिए पोषक तत्वों को सही अनुपात में लेने की सलाह देते हैं। ऐसी चीज़ें शामिल करने की कोशिश करें जिनमें कैलोरी कम और पोषण ज़्यादा हो, जैसे हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, अंडे, मांस, फल वगैरह। सेहतमंद आहार न सिर्फ मेटाबॉलिज़्म बढ़ाता है बल्कि मूड बेहतर कर दिमाग को भी तरोताज़ा करता है। यह रक्त संचार को नियमित रखने में मदद करता है और दिल को स्वस्थ रखता है।

एक बार में बहुत देर तक न बैठें

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एक जगह बहुत देर तक बैठे रहने से मोटापे, पुरानी बीमारियों और शरीर की खराब मुद्रा का खतरा बढ़ता है, यहां तक कि यह मेटाबॉलिक सिस्टम को भी बिगाड़ सकता है। ज़्यादातर कामकाजी लोग ब्लड प्रेशर की समस्या की शिकायत कर रहे हैं, जिसकी मुख्य वजह शरीर की हलचल की कमी है। 

करीब 800,000 लोगों को शामिल करने वाले कई अवलोकन अध्ययनों के संयुक्त नतीजों को देखने पर शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग सबसे ज़्यादा बैठे रहते थे, उनमें हृदय संबंधी घटनाओं में 147 प्रतिशत और इन घटनाओं से होने वाली मौतों में 90 प्रतिशत की बढ़ोतरी थी। इसके अलावा लंबे समय तक बैठे रहने से (खासकर यात्रा के दौरान) डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (खून का थक्का) का खतरा बढ़ जाता है। 

दांतों की सेहत का ठीक से ध्यान रखें

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कई अध्ययनों से पता चला है कि मसूड़ों की बीमारी पैदा करने वाले मुंह के बैक्टीरिया खून में पहुंच सकते हैं और C-रिएक्टिव प्रोटीन बढ़ा सकते हैं, जो रक्त वाहिकाओं में सूजन का एक संकेतक है। इससे हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है। दांतों और मसूड़ों की सेहत के लिए हम कम से कम हर छह महीने में अपने डेंटिस्ट से मिलने की सलाह देते हैं।  

दिल की बेहतर सेहत के लिए कार्डियोलॉजिस्ट से सलाह लें

कार्डियोलॉजिस्ट दिल का विशेषज्ञ होता है जो दिल से जुड़ी समस्याओं का इलाज कर सकता है। मरीज़ के लक्षणों के आधार पर कार्डियोलॉजिस्ट आसानी से असल वजह पकड़ सकते हैं और उसके लिए ज़रूरी दवा बता सकते हैं। अगर आपको कभी सीने में दर्द या सांस फूलने जैसा महसूस हो, तो हमारी सलाह है कि हृदय रोग विशेषज्ञ से मिलें।    

दवाएं ठीक से लें

जो लोग दिल से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित हैं, उन्हें दवाएं नियम से लेने की सलाह दी जाती है ताकि हार्ट अटैक या शुगर लेवल में अचानक उतार-चढ़ाव जैसी और जटिलताओं से बचा जा सके, जो ब्रेन हैमरेज का खतरा भी बढ़ाती हैं। 

दवा बीमारियों की रफ्तार धीमी करने और उन अतिरिक्त पेचीदगियों को काबू में रखने में भी मदद करती है जो शरीर के हृदय तंत्र पर बुरा असर डालती हैं। अगर आप डायबिटीज़ के मरीज़ हैं या ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रहे हैं, तो अपना शुगर लेवल और ब्लड प्रेशर जांचना न भूलें। अगर आपको लगे कि बताई गई दवाएं ठीक से असर नहीं कर रहीं, तो डॉक्टर से सलाह लें।

जितना हो सके, हंसिए 

अगर आपको पहले किसी ने नहीं बताया, तो हम बता रहे हैं कि खुलकर हंसना आपके दिल को सेहतमंद बना सकता है। हंसने से तनाव के हार्मोन घटते हैं, जिससे शरीर की धमनियों की सूजन कम होती है। यह HDL कोलेस्ट्रॉल (अच्छा कोलेस्ट्रॉल) भी बढ़ाता है, जो न सिर्फ दिल को स्वस्थ रखता है बल्कि पूरे शरीर को दुरुस्त करता है।

हंसने से दिमाग खुशी वाले हार्मोन छोड़ता है, जिससे आप अच्छा और तनावमुक्त महसूस करते हैं। 

जब भी मौका मिले, हंसिए, यह एक सस्ती दवा है

लॉर्ड बायरन (Lord Byron), अंग्रेज़ कवि

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अच्छी ज़िंदगी जीने के लिए अपने दिल का ख्याल रखना ज़रूरी हैएक सेहतमंद दिल शरीर के बाकी हिस्सों को ठीक से काम करने में मदद करता है। योग और रोज़ के व्यायाम के अलावा भी दिल को सेहतमंद रखने के कई तरीके हैं। अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव करके आप बेहतर ज़िंदगी जी सकते हैं। सेहतमंद जीवन के लिए एक रुटीन बनाकर शुरुआत करें और उसे पूरी निष्ठा से निभाएं।

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