चीनी हमारी हर मौक़े की साथी है। दोस्तों के साथ की कोई शाम हो या किसी का ब्रेकअप, हर कोई आइसक्रीम, बेकरी की चीज़ों जैसे चीनी से भरपूर खाने की ओर ही भागता है। चीनी देखने में चाहे जितनी लुभावनी लगे, ज़रूरत से ज़्यादा मात्रा में वह सेहत पर बुरा असर डाल सकती है।
एक अध्ययन के मुताबिक़ ज़्यादातर अमेरिकी हर साल लगभग 57 पाउंड चीनी खा जाते हैं। चीनी हर खाने-पीने की चीज़ में मिल जाती है, हालाँकि उनमें मौजूद चीनी की मात्रा अलग-अलग हो सकती है। मिसाल के तौर पर, जिन चीज़ों में चीनी की मात्रा बहुत ज़्यादा होती है, उन्हें पैकेज्ड फ़ूड कहा जाता है, जिन पर हम इस लेख के आगे के हिस्से में चर्चा करेंगे।
इस लेख में हम आपकी चीनी की खपत को समझने में आपकी मदद करेंगे और यह भी बताएँगे कि स्वस्थ और खुशहाल ज़िंदगी जीने के लिए आपको कौन से ज़रूरी बदलाव करने होंगे। पढ़ने का आनंद लीजिए!
चीनी क्या है? कितनी चीनी को ज़्यादा माना जाए?

चीनी लगभग हर उस चीज़ में मौजूद है जो हम खाते-पीते हैं, फलों और सब्ज़ियों से लेकर अनाज और डेयरी उत्पादों तक। इसके अलावा बाज़ार में ऐसी चीज़ों की भरमार है जिनमें शेल्फ़ लाइफ़ बढ़ाने और मिठास बढ़ाने के लिए ऊपर से चीनी (added sugar) मिलाई जाती है। यही मिलाई गई चीनी दिल से जुड़ी कई बीमारियों और सेहत की समस्याओं का ख़तरा बढ़ाने वाला एक बड़ा कारण है। लेकिन इस पर आगे बात करने से पहले, आइए पहले यह समझ लें कि चीनी होती क्या है।
चीनी एक घुलनशील कार्बोहाइड्रेट है जो कई खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक रूप से मौजूद होती है। यह दो रूपों में पाई जाती है। पहला रूप है सरल शर्करा, जिसे मोनोसैकराइड भी कहते हैं, जो फ्रुक्टोज़, ग्लूकोज़ और गैलेक्टोज़ के रूप में मिलती है। दूसरा रूप है यौगिक शर्करा या डाइसैकराइड, जो सरल शर्करा के दो अणुओं के मिलने से बनती है। इसका सबसे आम उदाहरण है सफ़ेद चीनी, जो सुक्रोज़ का परिष्कृत रूप है और ग्लूकोज़ व फ्रुक्टोज़ के मेल से बनती है।
सुक्रोज़ चुकंदर या गन्ने में पाया जाता है, जिसे व्यावसायिक स्तर पर निकालकर रिफ़ाइंड चीनी बनाई जाती है। इसे कुकीज़, केक, पेय पदार्थों जैसे प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में मिठास के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह मिलाई गई चीनी धीरे-धीरे इंसान को किसी न किसी बीमारी की चपेट में आने के ख़तरे की ओर धकेलती जाती है।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक़ महिलाओं और बच्चों को रोज़ाना लगभग 100 कैलोरी यानी 6 चम्मच मिलाई गई चीनी लेने की सलाह दी जाती है, जबकि पुरुष एक दिन में 9 चम्मच यानी 150 कैलोरी तक ले सकते हैं। अफ़सोस की बात यह है कि एक औसत अमेरिकी रोज़ाना लगभग 17 चम्मच मिलाई गई चीनी खा रहा है, जिसने उन्हें हृदय संबंधी कई बीमारियों की चपेट में ला दिया है।
क्या आप जानते हैं कि अमेरिकियों की खाने की थाली में बड़ा हिस्सा सॉफ़्ट ड्रिंक, जूस, सीरियल, कुकीज़, योगर्ट और डिब्बाबंद मांस, मछली जैसी प्रोसेस्ड चीज़ों का ही होता है?
हार्वर्ड टी.एच. चैन स्कूल ऑफ़ पब्लिक हेल्थ में पोषण के प्रोफ़ेसर डॉ. फ्रैंक हू कहते हैं, "मोटापे और मधुमेह (diabetes) पर ज़्यादा चीनी के असर के पुख़्ता प्रमाण मौजूद हैं, लेकिन जो बात कई पुरुषों को चौंका सकती है, वह यह है कि मीठे का उनका शौक़ उनके दिल की सेहत पर कितना गंभीर असर डाल सकता है।"
इसलिए ज़रूरी है कि अपनी चीनी की खपत पर नज़र रखी जाए। आइए अब उन तमाम समस्याओं पर नज़र डालते हैं जो चीनी के ज़्यादा सेवन से जुड़ी हैं।
ज़्यादा चीनी खाना हम पर किन 10 तरीक़ों से असर डालता है

मोटापा
अगर विशेषज्ञों की मानें, तो आजकल लोगों में मोटापे (obesity) की बढ़ती दर के पीछे चीनी ही सबसे बड़ा कारण है। इसका सबसे ज़्यादा असर कामकाजी लोगों और युवा पीढ़ी पर पड़ रहा है, क्योंकि पैकेज्ड फ़ूड के सबसे बड़े उपभोक्ता वही हैं। लोग ज़्यादातर प्रोसेस्ड फ़ूड पर निर्भर रहने लगे हैं, क्योंकि वह झंझट से मुक्त है और आसानी से मिल जाता है।
जब आपको भूख लगती है, तो आप खाने की सामग्री पर नज़र नहीं डालते, बल्कि ऐसे विकल्प ढूँढ़ते हैं जो तुरंत ऊर्जा दे सकें। लेकिन चीनी पोषण देने के बजाय आपको ढेर सारी कैलोरी थमा जाती है। इससे व्यक्ति की कुल कैलोरी खपत बढ़ जाती है। इन कैलोरी को खोखली कैलोरी (empty calories) कहा जाता है, सिर्फ़ इसलिए कि ये शरीर को ज़रूरी पोषण नहीं दे पातीं।
पैकेज्ड फ़ूड और उससे परहेज़ करने के 10 सबसे बड़े कारणों के बारे में और जानने के लिए हमारा यह लेख पढ़ें।
शरीर को हर दिन एक निश्चित मात्रा में कैलोरी की ज़रूरत तो होती है, लेकिन ज़्यादा खपत आपके शरीर के तंत्र पर बोझ डाल सकती है और कैलोरी को चर्बी में बदल सकती है। तो अगली बार जब आप रेडी-टू-ईट खाने पर टूट पड़ें, तो उसमें चीनी की मात्रा देखना न भूलें।
दिल से जुड़ी बीमारियाँ
चीनी का ज़रूरत से ज़्यादा सेवन दिल पर असर डालता है और हृदय रोगों का ख़तरा बढ़ाता है। विशेषज्ञ अभी यह समझने की कोशिश कर ही रहे हैं कि चीनी दिल पर असर कैसे डालती है, लेकिन यह लिवर पर शराब की ही तरह भारी दबाव डालती है। लिवर खाने से मिले कार्बोहाइड्रेट को चर्बी में बदलता है, और चीनी की ज़्यादा मात्रा लिवर पर बोझ डालकर उसे इस रूपांतरण की रफ़्तार बढ़ाने पर मजबूर कर देती है।
चीनी का भारी सेवन रक्तचाप (blood pressure) भी बढ़ाता है और शरीर में पुरानी सूजन (chronic inflammation) को बढ़ावा देता है; ये दोनों ही दिल की बीमारियों का रास्ता खोलते हैं।
टाइप 2 मधुमेह

आइए अब उस आम बीमारी की बात करते हैं जिससे आज पूरी दुनिया जूझ रही है, यानी टाइप 2 मधुमेह (Type 2 Diabetes)। चीनी से भरपूर खाने-पीने की चीज़ों का लगातार सेवन मधुमेह की चपेट में आने का ख़तरा बढ़ा सकता है। मधुमेह ने मृत्यु दर में बड़ा बदलाव ला दिया है और जीवन प्रत्याशा भी घटा दी है।
पिछले कुछ दशकों में दुनिया में चीनी की खपत दोगुनी हो गई है। लंबे समय तक चीनी का सेवन इंसुलिन के प्रति प्रतिरोध (insulin resistance) पैदा कर सकता है। इंसुलिन अग्न्याशय (pancreas) से बनने वाला वह हॉर्मोन है जो व्यक्ति के रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है।
इंसुलिन प्रतिरोध से रक्त शर्करा का स्तर बढ़ जाता है, जिससे मधुमेह होने की आशंका काफ़ी बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग लगातार मीठे पेय पीते हैं, उनमें मधुमेह होने की आशंका ज़्यादा होती है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर
शरीर में पनपती बीमारियों से लड़ने का काम प्रतिरक्षा तंत्र (immune system) ही करता है। लेकिन अगर हम आपसे कहें कि जिस चीनी का आप इतनी दरियादिली से सेवन करते हैं, वही आपके प्रतिरक्षा तंत्र पर असर डालकर उसकी काम करने की क्षमता घटा सकती है, तो? जी हाँ, बैक्टीरिया और यीस्ट चीनी पर ही पलते हैं, इसलिए इसकी अधिक मात्रा उनकी संख्या बढ़ाने और संक्रमण फैलाने में उनकी मदद करती है। यह व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर डालती है, जिससे वह बार-बार बीमार पड़ता है या बार-बार संक्रमण की चपेट में आता रहता है।
बुढ़ापे की रफ़्तार तेज़

अगर आप बहुत ज़्यादा चीनी खा रहे हैं, तो कोई भी एंटी-एजिंग क्रीम काम नहीं आ सकती। चीनी प्रोटीन के साथ मिलकर बुढ़ापे की रफ़्तार तेज़ कर देती है, जिससे समय से पहले बुढ़ापा आ जाता है। त्वचा अपना लचीलापन खो देती है और इंसान उम्रदराज़ दिखने लगता है। इसके अलावा, चीनी से भरपूर आहार लेने से AGEs (Advanced Glycation End Products) बन सकते हैं। यह वह यौगिक है जो रक्त में चीनी के प्रोटीन के साथ मिलने पर बनता है। AGEs शरीर में मौजूद कोलेजन और इलास्टिन को नुक़सान पहुँचाते हैं, यानी उन प्रोटीनों को जो जवाँ दिखने का ज़िम्मा उठाते हैं और त्वचा को लचीला बनाए रखते हैं।
इसलिए चीनी का सेवन नियंत्रित मात्रा में करना ज़रूरी है।
मुहाँसे
ज़िंदगी में कम से कम एक बार तो हम सभी परेशान करने वाले मुहाँसों और फुंसियों से जूझ चुके हैं। लेकिन आइए, हम आपको इसकी वजह बताते हैं। वयस्कों में मुहाँसों (acne) के पनपने के लिए चीनी से लदे खाद्य पदार्थ ही ज़िम्मेदार हैं। ज़्यादा चीनी से रक्त शर्करा और इंसुलिन का स्तर अचानक बढ़ जाता है, जिससे तेल का उत्पादन और सूजन बढ़ती है, और ये सभी चीज़ें मुहाँसों के पनपने से जुड़ी हैं।
24,452 प्रतिभागियों पर हुए एक अध्ययन में पाया गया कि वयस्कों में मुहाँसों की बढ़ती दर के पीछे मीठे और चिकनाई वाले उत्पादों का भारी सेवन ही है।
दाँतों की सड़न
जैसा कि ऊपर बताया गया, चीनी बैक्टीरिया और कीटाणुओं की ख़ुराक है, जो शरीर के कई अंगों को गंभीर नुक़सान पहुँचा सकते हैं, और इन्हीं अंगों में शामिल हैं दाँत। लंबे समय तक चीनी के सेवन से दाँत और मसूड़े सड़ने लगते हैं। चीनी दाँतों को किसी भी दूसरी खाने की चीज़ से कहीं ज़्यादा गंभीर नुक़सान पहुँचाती है।
जिन्हें रोज़ चीनी खाने की आदत है, उन्हें समय-समय पर जाँच के लिए दंत चिकित्सक से मिलने की सलाह दी जाती है। आम तौर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ दिन में दो बार ब्रश करने के साथ-साथ ठीक से फ़्लॉस करने की सलाह देते हैं।
तनाव और अवसाद में बढ़ोतरी

जहाँ सही आहार आपका मूड बेहतर कर सकता है, वहीं चीनी से भरपूर आहार इसका उल्टा करके आपको बेचैन और तनावग्रस्त महसूस करा सकता है। इसका संबंध याददाश्त की समस्याओं और अवसाद (depression) से भी जोड़ा जाता है। 8,000 पुरुषों पर हुए एक अध्ययन में पाया गया कि जो लोग 67 ग्राम या उससे ज़्यादा चीनी लेते थे, उनमें तनावग्रस्त होने की आशंका, रोज़ाना 40 ग्राम लेने वालों के मुक़ाबले 23% ज़्यादा थी।
जब तनाव ज़्यादा गंभीर हो जाता है, तो वह अवसाद का रूप ले सकता है। ऐसी स्थितियों में मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक की मदद लेने की सलाह दी जाती है।
कैंसर का ख़तरा
ऐसे कई अध्ययन हैं जिन्होंने चीनी के सेवन को अलग-अलग तरह के कैंसर से जोड़ा है। चीनी की ज़्यादा मात्रा के सेवन से मोटापा और इंसुलिन प्रतिरोध होता है, और ये दोनों ही कैंसर का ख़तरा बढ़ा सकते हैं।
22,720 पुरुषों पर 9 साल तक चले एक अध्ययन में पाया गया कि चीनी से लदे उत्पादों और पेय पदार्थों की भारी खपत से प्रोस्टेट कैंसर का ख़तरा बढ़ गया।
शोधकर्ता अब भी कई अध्ययनों के ज़रिये चीनी और कैंसर के बीच के रिश्ते को समझने की कोशिश कर रहे हैं। ठीक ही कहा गया है कि इलाज से परहेज़ बेहतर है। इसलिए ज़रूरी है कि हम अपनी चीनी की खपत को समझें और आहार में ज़रूरी बदलाव करें।
ऊर्जा को सोख लेने वाली
चीनी वाले उत्पादों में कैलोरी तो ख़ूब होती है, लेकिन ज़रूरी प्रोटीन और फ़ाइबर नदारद रहते हैं। यह फटाफट ऊर्जा तो दे सकती है, पर वह टिकती नहीं, और उसके बाद रक्त शर्करा में तेज़ गिरावट आती है। रक्त शर्करा का यह लगातार उतार-चढ़ाव व्यक्ति की ऊर्जा के स्तर में खलल डाल सकता है। चीनी खाने के 60 मिनट के भीतर व्यक्ति की सतर्कता का स्तर घटा देती है और 30 मिनट के भीतर थकान बढ़ा देती है। यह सिलसिला लगातार चलता रहे, तो व्यक्ति की ऊर्जा निचुड़ जाती है और वह थका-हारा और कमज़ोर महसूस करता है। इसीलिए विशेषज्ञ ऐसी चीज़ें खाने की सलाह देते हैं जिनमें फ़ाइबर भरपूर हो और मिलाई गई चीनी कम हो।
ज़्यादा चीनी शरीर के सामान्य कामकाज को कुछ और तरीक़ों से भी बिगाड़ती है। जैसे, यह इंसान को इसका लती बना सकती है। चीनी ओपिओइड और डोपामीन जैसे रसायनों के स्राव को बढ़ावा देती है, जिनसे इंसान खुश और अच्छा महसूस करता है, और लंबे समय तक यही चलता रहे तो उसे और की तलब लगने लगती है। यह सामान्य भूख में भी दख़ल देती है, जिससे पेट भरा होने पर भी लोगों को भूख महसूस होती रहती है।
अपने खान-पान की बनावट को जानना बेहद ज़रूरी है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि कौन सी चीज़ें चीनी से ठसाठस भरी हैं और दिन भर में कितनी चीनी खाई जा रही है। इस तरह आप उन उत्पादों को आसानी से छोड़ सकते हैं जो आपकी रक्त शर्करा बढ़ाने में सबसे बड़े ज़िम्मेदार हैं। कोशिश करें कि ऐसी चीज़ों को तरजीह दें जो ऊर्जा देती हों और फ़ाइबर से भरपूर हों। पैकेज्ड फ़ूड की खपत घटाने का सबसे अच्छा तरीक़ा है घर पर खाना बनाना और पैकेट वाली चीज़ों की जगह ताज़ी चीज़ें अपनाना, जैसे सब्ज़ियाँ, मांस, मछली आदि। बेहतर ज़िंदगी जीने के लिए खान-पान के सेहतमंद विकल्प चुनना ज़रूरी है।
✦ होम Read in English
