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आज की दुनिया में युवा आत्म-अनुशासन कैसे विकसित करें: 10 तरीक़े

आज की दुनिया में आत्म-अनुशासन विकसित करना युवाओं और बड़ों, दोनों के लिए एक भारी और मुश्किल काम हो सकता है।

लेखक: · 2 दिसंबर 2022 · 8 मिनट में पढ़ें

जिस दुनिया में हम आज रह रहे हैं, वह जितनी खूबसूरत है, उतनी ही चुनौतियों से भरी भी है। सामने आने वाली चुनौतियाँ अक्सर अनुशासन की परीक्षा बनकर आती हैं और हमें आगे बढ़ने और खुद को निखारने का मौक़ा देती हैं। आज की दुनिया हमारी राह में जो अड़चनें खड़ी करती है, उनके पीछे आत्म-अनुशासन हमारी पहुँच से और दूर होता दिखता है। 

बचपन या किशोरावस्था में ही आत्म-अनुशासन विकसित करने की दिशा में काम करना दिन-ब-दिन ज़्यादा ज़रूरी होता जा रहा है, ताकि बड़े होकर सच्ची खुशी पाई जा सके। युवा कई तरह के अभ्यासों और अपनी ज़िंदगी में कुछ आसान बदलावों के ज़रिये खुद ही आत्म-अनुशासन विकसित कर सकते हैं। लेकिन सवाल यह है कि शुरुआत कहाँ से की जाए। 

युवाओं में आत्म-अनुशासन विकसित करने के ये 10 तरीक़े युवाओं और बड़ों, दोनों को खुद पर काम करने में मदद के लिए हैं। ये आगे बढ़ने की बुनियाद बन सकते हैं, या एक ऐसा ख़ाका जिससे कोई बड़ा मार्गदर्शक प्रेरणा ले सके। दोनों ही सूरतों में, ये हम सभी को आज की दुनिया में आत्म-अनुशासन की राह की इन चुनौतियों से पार पाने और बेहतर, खुशहाल इंसान बनने में मदद कर सकते हैं। 

सेल्फ़-केयर को अपने शब्दों में समझें और अपनाएँ

सेल्फ़-केयर आज की दुनिया में एक लोकप्रिय शब्द बन चुका है, और अक्सर इसे ग़लत ही समझा जाता है। इसीलिए आत्म-अनुशासन विकसित करने की ओर पहला क़दम है सेल्फ़-केयर की अपनी परिभाषा गढ़ना।

Define and Practice Self Care

खुद का ख़याल रखना हमेशा सिर्फ़ ब्रेक लेने और कुछ पल के लिए ज़िंदगी को भुला देने का नाम नहीं है। इसका मतलब वह मुश्किल काम करना भी है जो आप जानते हैं कि करना ज़रूरी है, पर जिसे स्वीकारने और करने में आप जूझते रहते हैं। 

सेल्फ़-केयर के विचार को समझने के लिए समय निकालें और सोचें कि अमल में वह कैसा दिख सकता है। यह हर व्यक्ति के लिए बिलकुल अलग अभ्यास है। इसीलिए ज़रूरी है कि किसी और की परिभाषा पर चलने से पहले आप जान लें कि आपके लिए इसका मतलब क्या है। 

छोटे लक्ष्य तय करें

आत्म-अनुशासन विकसित करने का बड़ा लक्ष्य बेहद भारी लग सकता है। आज की दुनिया सफलता के बारे में तस्वीरों और संदेशों से पटी पड़ी है कि सफलता कैसी दिखती है और वहाँ तक कैसे पहुँचा जाए। जिसे मीडिया ने सफल क़रार दे दिया हो, उससे अपनी तुलना करना बहुत आसान है, और इसी से यह लक्ष्य असंभव लगने लगता है।

Small Goals

इतने बड़े विचार से निपटने की कुंजी है छोटे लक्ष्यों से शुरुआत करना। हर दिन सिर्फ़ पाँच मिनट निकालकर आत्म-अनुशासन को परिभाषित करना और अपने लक्ष्य लिखना भी शुरुआत की एक शानदार जगह है। फिर बड़े लक्ष्यों को छोटे, हासिल किए जा सकने वाले कामों में बाँटने से आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।

एक ढाँचा और दिनचर्या बनाएँ

कोई भी नया हुनर विकसित करने के लिए खुद के लिए एक अनुकूल माहौल बनाना सफलता की ओर बढ़ने के सबसे अच्छे तरीक़ों में से एक है। इस माहौल में एक तय ढाँचा और दिनचर्या ज़रूरी है। कई वैज्ञानिक अध्ययन हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में दिनचर्या के फ़ायदों पर चर्चा करते हैं, जो इसकी ज़रूरत को और पुख़्ता करता है। 

दिनचर्या तनाव घटाने में मदद करती है, नींद की गुणवत्ता सुधारती है, शारीरिक गतिविधि के लिए ज़्यादा गुंजाइश बनाती है और नई आदतें डालना कहीं आसान कर देती है। आत्म-अनुशासन विकसित करने के लिहाज़ से दिनचर्या इस प्रक्रिया में बड़ी मददगार तो है ही, साथ ही यह खुद इस हुनर का अभ्यास भी है। 

जर्नल लिखें

हर सुबह जर्नल लिखने के लिए समय निकालकर अपनी दिनचर्या बनाना शुरू करें। इससे एक स्थिर ठिकाना मिलता है जहाँ आप छोटे लक्ष्य तय कर सकते हैं, इस पर विचार कर सकते हैं कि सेल्फ़-केयर और आत्म-अनुशासन आपके लिए क्या मायने रखते हैं, और आगे देख सकते हैं कि बढ़ते रहने के लिए आप क्या कर सकते हैं।

जर्नल एक ऐसी जगह है जो सिर्फ़ आपकी है। इसे कभी किसी को पढ़कर सुनाने, दिखाने या ऐसा कुछ लिखने की ज़रूरत नहीं जो आप लिखना न चाहें। यह महज़ एक ऐसा ज़रिया है जो इस प्रक्रिया को सिर्फ़ सोच-विचार तक सीमित न रखकर ज़्यादा ठोस बना देता है।

माइंडफुलनेस का अभ्यास शुरू करें

माइंडफुलनेस को अक्सर हर मर्ज़ की दवा माना जाता है। यह बात समझ में आती है, क्योंकि हमारी आधुनिक दुनिया ऐसी उत्तेजक चीज़ों से भरी है जो दिमाग़ को वर्तमान से खींचकर दूर ले जाती हैं। माइंडफुलनेस का अभ्यास व्यक्ति को विचारों की किसी और ही दुनिया में भटकने के बजाय, जो हो रहा है उस पर लौटा लाता है। 

Mindfulness meditation

माइंडफुलनेस का अभ्यास आपको आत्म-अनुशासन से जुड़ी भावनाओं के प्रति सजग बना सकता है। मिसाल के तौर पर, अगर किसी काम में अनुशासन बनाए रखने में आप जूझ रहे हैं, तो इस बारे में सजग रहने से आप पहचान सकते हैं कि आप किसी हालिया ब्रेकअप के बारे में सोच रहे हैं, दफ़्तर के किसी आने वाले काम के बारे में, या बस ध्यान टिकाए रखने में मुश्किल महसूस कर रहे हैं।

अपनी अड़चनों को पहचानना आत्म-अनुशासन विकसित करने की सबसे अच्छी शुरुआतों में से एक है। और इस प्रक्रिया को शुरू करने का सबसे मददगार ज़रिया है माइंडफुलनेस का अभ्यास। 

डिजिटल डिटॉक्स करें

आज स्क्रीनें हर जगह हैं। मुमकिन है, आप इसे भी किसी स्क्रीन पर ही पढ़ रहे हों। एक औसत व्यक्ति दिन में लगभग 7 घंटे स्क्रीन देखते हुए बिताता है, जो हमारी ज़िंदगी का बहुत बड़ा हिस्सा है।

Digital Detox

स्क्रीनें सिर्फ़ शारीरिक सेहत पर ही असर नहीं डालतीं, बल्कि खुद को देखने का हमारा नज़रिया भी बिगाड़ सकती हैं। सोशल मीडिया तुलना के लिए एक न रुकने वाली धारा मुहैया कराता है, जो जल्दी ही आत्म-संदेह की ओर ले जा सकती है। 

एक छोटा सा डिजिटल डिटॉक्स, जिसमें स्क्रीन टाइम सीमित कर दिया जाए या पूरी तरह बंद कर दिया जाए, युवाओं में आत्म-अनुशासन विकसित करने में ज़बरदस्त फ़ायदे दे सकता है। इससे उन्हें आख़िरकार तुलना करने के बजाय आत्म-चिंतन के लिए जगह मिल पाती है। 

कोई नया काम अपनाएँ

एक स्थिर और सार्थक करियर उन वजहों में से एक है जिनके लिए बहुत से लोग आत्म-अनुशासन विकसित करना चाहते हैं। काम की दुनिया में क़दम रखते समय गली के नुक्कड़ वाली स्मूदी की दुकान की पहली नौकरी पकड़ लेना आसान है, लेकिन वहाँ प्रेरणा ढूँढ़ पाना मुश्किल हो सकता है।

Take on a new job that is inspiring

ऐसा काम अपनाना जो प्रेरित करे, आत्म-अनुशासन की ओर एक अहम पहला क़दम हो सकता है। हाँ, इससे घर से निकलकर काम पर जाना आसान हो जाता है। साथ ही, यह एक ऐसी जीवनशैली भी देता है जिसमें इंसान बैठकर नापसंद नौकरी पर जाने के डर से घुटने के बजाय, खुद पर ज़्यादा काम कर सकता है।

नए शौक़ तलाशें

कोई नया शौक़ विकसित करना एक और तरीक़ा है जिससे आत्म-अनुशासन ज़्यादा हासिल करने लायक़ लगने लगता है। कोई नया खेल, हुनर या समूह आपके लिए ऐसा समय निकालेगा जिसमें आप अपने जुनून के पीछे लगे रहेंगे। आत्म-अनुशासन एक आसान पहुँच वाला लक्ष्य लगने लगेगा, सिर्फ़ इसलिए कि जो काम सामने है, उसे आप खुद करना चाहते हैं। 

New hobbies

इन शौक़ों के भीतर आप नई चुनौतियाँ गढ़ सकते हैं, छोटे लक्ष्य तय कर सकते हैं, सजग रह सकते हैं और एक ज़्यादा नियंत्रित माहौल में आत्म-अनुशासन का अभ्यास कर सकते हैं। याद रखिए, बाढ़ आ जाने पर बाँध नहीं बाँधे जाते। एक सुखद, आसान माहौल में आत्म-अनुशासन विकसित करना आपको उन पलों के लिए तैयार करेगा जो भटकाव और दूसरी रुकावटों से भरे होते हैं। 

शारीरिक व्यायाम

व्यायाम की दिनचर्या बनाना बहुतों के लिए आत्म-अनुशासन पाने के मुश्किल तरीक़ों में से एक होगा, लेकिन यह सबसे अहम तरीक़ों में भी गिना जा सकता है। यह एक और ऐसा मैदान है जहाँ आप धीरे-धीरे बढ़ते लक्ष्य तय कर सकते हैं और उन्हें ज़्यादा हक़ीक़त के क़रीब बना सकते हैं, ताकि आत्म-अनुशासन धीरे-धीरे मज़बूत होता जाए।

Exercising For Self-Discipline

बात रोज़ दस मील दौड़ने या बेंच प्रेस में अपना निजी रिकॉर्ड तोड़ने की है ही नहीं। बस व्यायाम तक पहुँच जाना और उसे शुरू कर देना ही हमारे दिमाग़ में आत्म-अनुशासन की ओर जाने वाली राहों को गहरा करता है, ताकि आगे चलकर उन पर चलना आसान हो जाए।  

मदद माँगें

और आख़िर में, मदद माँगने से घबराएँ नहीं। जवाबदेही एक उपयोगी ज़रिया है जिससे आत्म-अनुशासन विकसित करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। एक मार्गदर्शक आपको अनुशासित मन और शरीर की ओर जाने वाली घुमावदार और अक्सर उलझन भरी राह पर आगे बढ़ने में मदद कर सकता है।

याद रखिए, ऐसी दुनिया में खुद को अकेला महसूस करना आसान है जो इतनी व्यस्त है और जहाँ हर कोई अपने ही काम में लगा है। हममें से हर कोई आगे बढ़ने के अपने ही सफ़र पर है, और जो लोग हमसे पहले यह राह चल चुके हैं, वे हमें अपने साथ आगे ले चलने में मदद के लिए मौजूद हैं।